नारी
दृढ़ संकल्पित में नारी हूँ, अपने अधिकारों की अधिकारी हूँ। प्रखर प्रगति की आस जगाए, धैर्यवान जग उपकारी हूँ। नील गगन में उड़ चलूँ मैं, पंख पसार पंछी बन प्यारी। आँखों में नव स्वप्न सजाकर, धवल छवि रख जीवन सारी। मैं सारी सृष्टि में सबसे प्यारा, सबसे कोमल हूँ। कुदृष्टि के नाश हेतु […]
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