बनारस की बारिश और मैं

किस्सा शायद( शायद इसलिए कि अब कुछ धुंधली याद ही रह गई हैं) 1991का है, जब मैं चौथी कक्षा में पढ़ रही थी, पापा एंबेसडर कार लेकर आए थे तो घर में सब बहुत खुश थे इसी बीच मम्मी ने कहा कि जब कोई नई वस्तु खरीद कर लाते हैं तो सबसे पहले भगवान का […]

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खुशियों का आशियां

सुबह पांच बजे उठकर अपनी बिटिया के लिए लंच बनाते हुए मधुर भजनों के साथ मेरे दिन की शुरुवात होती है, जो लोग मुझे व्यक्तिगत तौर पर जानते हैं उन्हें पता है गाने सुनना और और गाने गुनगुनाना मुझे बहुत पसंद है ।चाहे वो भजन हो ग़ज़ल हो या कोई भी फिल्मी गाना। इसी क्रम […]

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संस्मरण- ” गुस्सा कम हुआ या नहीं?”

आज जब भी मुझे गुस्सा आता है उसके तुरन्त बाद ही मेरे चेहरे पर हल्की सी मुस्कान की लहर दौड़ जाती है ।आप कहेंगे कि ऐसा तो संभव ही नहीं है, लेकिन गुस्से के पीछे एक बहुत ही रोचक किस्सा छुपा हुआ है, जो कि आज भी मुझे गुदगुदा ही जाता है । लेख में […]

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संस्कार बनाम सोशल संस्कार

मेरी इस लेख का शीर्षक पढ़कर कुछ लोग असमंजस में होंगे या इसे मजाक में टाल सकते हैं लेकिन यह शीर्षक मैंने क्यों दिया, इसके लिए मेरे अपने तर्क हैं, हो सकता है इससे आप सहमत हो या असहमत भी हो सकते हैं क्योंकि मुझे यह विषय चिंताजनक लगा। अतः मैंने इसे अपनी लेखनी के […]

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नारी

दृढ़ संकल्पित में नारी हूँ, अपने अधिकारों की अधिकारी हूँ। प्रखर प्रगति की आस जगाए, धैर्यवान जग उपकारी हूँ।   नील गगन में उड़ चलूँ मैं, पंख पसार पंछी बन प्यारी। आँखों में नव स्वप्न सजाकर, धवल छवि रख जीवन सारी।   मैं सारी सृष्टि में सबसे प्यारा, सबसे कोमल हूँ। कुदृष्टि के नाश हेतु […]

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महाशिवरात्रि

पर्व सुहावन आज, घड़ी शुभ दिन है आया। प्रकट हुए शिवनाथ, रूप प्रभु सबको भाया।। झूम उठे चहुँ लोक, देव सब है हर्षाए। मंगल बेला देख, सुमन नभ से बरसाए।।   सजे देवालय द्वार, दीप से हो उजियारा। बजे झाँझ करताल, ध्वनित शिव मंदिर सारा ।। गूंज रहा प्रभु नाम, शिवम का कर जयकारा। देव […]

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प्रेम

पता नहीं किसने कह दिया घुटनों के बल बैठकर गुलाब देने को प्रेम कहते हैं! आज फलां डे कल फलां डे! सचमुच का प्रेम तो वही कि जहाँ बातें ही ख़त्म न हों, वो जिससे बातें करते आप कभी न थकें, और कभी शब्द एक दूसरे से गुज़रते हुए आँखों में आकर तिरोहित हो जाएँ […]

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प्रेम तपस्या

प्रेम सधे सुर प्रीतम तेरे, कर आराधन साधा तुमने । प्रेम तपस्या मुश्किल सब से , जीती है हर बाधा तुमने।। नाम मिटाना मैं का पड़ता, पल-पल साथ निभाया तुमने। अहम छोड़ मैं-मैं का तुम ने, मैं-तू एक बनाया तुमने।। कोरा कागज हिय का आंगन, चित्र प्रेम का खींचा तुमने । मुस्कानों के मृदु झरने […]

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अवध को लौटें हैं श्री राम….

अवध को लौटें हैं श्री राम…. अवध को लौटें हैं श्री राम, संग में सिया- लखन गुण धाम। अवध को लौटें हैं श्री राम।।   नैन जुड़ाऊँ,शीश झुकाऊँ देहरी पर मैं दीप जलाऊँ, देखूँ सुबहों – शाम । अवध को लौटें हैं श्री राम।।   विपदा में सब भक्त पुकारे अँसुवन से बस चरण पखारे, […]

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दोहे

अखिल निखिल विस्मित हुआ, सुन राधा की बात।                      विस्मित प्रात: दोपहर, विस्मित संध्या- रात।। कमलनयन के कंठ में, यह बैजंती माल। मोहित सारी गोपियां, राधा है बेहाल। अधर मृदुल मुस्कान है, मृदुल सुहावन बैन। और मृदुल धुन वंशिका, आप मुँद रहे नैन। गोकुल विरही हो […]

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