बेटों की विदाई

बेटियां लौटी अपने आंगन में झूले जब-जब पड़े सावन में। अपने घर लौटने के लिए तरस गए उस घर के ही लाल बीते कितने वसंत,कितने ही साल। हमारे पुरुष प्रधान समाज में बेटियों की विदाई एक सामान्य सी बात होने साथ, एक प्रथा के रूप में हमारे मन -मस्तिष्क में छप सी गई है। उस […]

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बनारस की बारिश और मैं

किस्सा शायद( शायद इसलिए कि अब कुछ धुंधली याद ही रह गई हैं) 1991का है, जब मैं चौथी कक्षा में पढ़ रही थी, पापा एंबेसडर कार लेकर आए थे तो घर में सब बहुत खुश थे इसी बीच मम्मी ने कहा कि जब कोई नई वस्तु खरीद कर लाते हैं तो सबसे पहले भगवान का […]

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दोहे…

झाँका अपनी आँख में,देखी जो तस्वीर। गम का था सागर वहाँ, छलक रही थी पीर।। तोड़ रहे पग-पग हमें, कुछ पत्थर दिल लोग। मन करता है छोड़ सब, ले लें हम अब जोग।। लोगों का मत पूछिये, सब संवेदनहीन। जरुरत भर को साथ हैं,साँप बने आस्तीन।। जब चाहा तब दर्द दे, दिया कलेजा चीर। स्वार्थी […]

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सावन के गीत….

सावन मेरे घर आया है ,। रिमझिम की बरसात लिये।। -२ मेरा आंँगन भीग रहा है, मन का दर्पण भीग रहा है। ऐसी पड़ी फुहार अचानक। मेरा यौवन भीग रहा है।। परदेसी भी घर आ जाता। प्रेम भरी सौगात लिये।। सावन मेरे घर आया है ।।.. बादल की यह उमड़न-घुमड़न। काँप-काँप जाती है धड़कन। चकाचौध […]

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खुशियों का आशियां

सुबह पांच बजे उठकर अपनी बिटिया के लिए लंच बनाते हुए मधुर भजनों के साथ मेरे दिन की शुरुवात होती है, जो लोग मुझे व्यक्तिगत तौर पर जानते हैं उन्हें पता है गाने सुनना और और गाने गुनगुनाना मुझे बहुत पसंद है ।चाहे वो भजन हो ग़ज़ल हो या कोई भी फिल्मी गाना। इसी क्रम […]

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सरोजिनी नायडू जी के जन्मदिन पर विशेष

आज जन्मदिन एक ऐसी सशक्त महिला का जिन्हे हम भारत कोकिला के नाम से भी जानते हैं जिन्होंने काव्य जगत तथा भारतीय राजनीति में अपनी सक्रिय एवम् अहम भूमिका निभाई। जिनका जन्म 13 फ़रवरी 1879 में हैदराबाद में हुआ ,जिन्हें सरोजिनी नायडू जी के नाम से जानते हैं। इनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक बंगाली ब्राह्मण […]

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संस्मरण- ” गुस्सा कम हुआ या नहीं?”

आज जब भी मुझे गुस्सा आता है उसके तुरन्त बाद ही मेरे चेहरे पर हल्की सी मुस्कान की लहर दौड़ जाती है ।आप कहेंगे कि ऐसा तो संभव ही नहीं है, लेकिन गुस्से के पीछे एक बहुत ही रोचक किस्सा छुपा हुआ है, जो कि आज भी मुझे गुदगुदा ही जाता है । लेख में […]

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संस्कार बनाम सोशल संस्कार

मेरी इस लेख का शीर्षक पढ़कर कुछ लोग असमंजस में होंगे या इसे मजाक में टाल सकते हैं लेकिन यह शीर्षक मैंने क्यों दिया, इसके लिए मेरे अपने तर्क हैं, हो सकता है इससे आप सहमत हो या असहमत भी हो सकते हैं क्योंकि मुझे यह विषय चिंताजनक लगा। अतः मैंने इसे अपनी लेखनी के […]

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मजदूर

मजदूर लोहे सी किस्मत पर मेहनत के हथौड़े पिटता मजदूर ईटों को सिर पर ढोता मजदूर बालू और सीमेंट की बोरियों को पीठ पर लाद कर भागता मज़दूर फावड़े और छिन्नियो से अपनी किस्मत को कुरेदता मजदूर आंखों में सुखद भविष्य की आशा लिए कितना मजबूर सुबह से शाम तक थकता चूर चूर मेहनत के […]

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साधारण दिखने वाली असाधारण महिला की कहानी

हर महिला का जीवन काफी चुनौतियों से भरा होता है, लेकिन उन चुनौतियों के बीच आखिरकार उसे ही यह तय करना होता है कि इस जीवन को किस रूप में आगे बढ़ाना है। आज मैं कहानी सुनाने वाली हूँ साधारण सी दिखने वाली असाधारण महिला सुधा वैद्य की, खुशमिजाज, सरल, सहज और मिलनसार सुधा वैद्य […]

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