बेटों की विदाई
बेटियां लौटी अपने आंगन में झूले जब-जब पड़े सावन में। अपने घर लौटने के लिए तरस गए उस घर के ही लाल बीते कितने वसंत,कितने ही साल। हमारे पुरुष प्रधान समाज में बेटियों की विदाई एक सामान्य सी बात होने साथ, एक प्रथा के रूप में हमारे मन -मस्तिष्क में छप सी गई है। उस […]
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