बेटों की विदाई

बेटियां लौटी अपने आंगन में झूले जब-जब पड़े सावन में। अपने घर लौटने के लिए तरस गए उस घर के ही लाल बीते कितने वसंत,कितने ही साल। हमारे पुरुष प्रधान समाज में बेटियों की विदाई एक सामान्य सी बात होने साथ, एक प्रथा के रूप में हमारे मन -मस्तिष्क में छप सी गई है। उस […]

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दोहे…

झाँका अपनी आँख में,देखी जो तस्वीर। गम का था सागर वहाँ, छलक रही थी पीर।। तोड़ रहे पग-पग हमें, कुछ पत्थर दिल लोग। मन करता है छोड़ सब, ले लें हम अब जोग।। लोगों का मत पूछिये, सब संवेदनहीन। जरुरत भर को साथ हैं,साँप बने आस्तीन।। जब चाहा तब दर्द दे, दिया कलेजा चीर। स्वार्थी […]

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सावन के गीत….

सावन मेरे घर आया है ,। रिमझिम की बरसात लिये।। -२ मेरा आंँगन भीग रहा है, मन का दर्पण भीग रहा है। ऐसी पड़ी फुहार अचानक। मेरा यौवन भीग रहा है।। परदेसी भी घर आ जाता। प्रेम भरी सौगात लिये।। सावन मेरे घर आया है ।।.. बादल की यह उमड़न-घुमड़न। काँप-काँप जाती है धड़कन। चकाचौध […]

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सरोजिनी नायडू जी के जन्मदिन पर विशेष

आज जन्मदिन एक ऐसी सशक्त महिला का जिन्हे हम भारत कोकिला के नाम से भी जानते हैं जिन्होंने काव्य जगत तथा भारतीय राजनीति में अपनी सक्रिय एवम् अहम भूमिका निभाई। जिनका जन्म 13 फ़रवरी 1879 में हैदराबाद में हुआ ,जिन्हें सरोजिनी नायडू जी के नाम से जानते हैं। इनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक बंगाली ब्राह्मण […]

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मजदूर

मजदूर लोहे सी किस्मत पर मेहनत के हथौड़े पिटता मजदूर ईटों को सिर पर ढोता मजदूर बालू और सीमेंट की बोरियों को पीठ पर लाद कर भागता मज़दूर फावड़े और छिन्नियो से अपनी किस्मत को कुरेदता मजदूर आंखों में सुखद भविष्य की आशा लिए कितना मजबूर सुबह से शाम तक थकता चूर चूर मेहनत के […]

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साधारण दिखने वाली असाधारण महिला की कहानी

हर महिला का जीवन काफी चुनौतियों से भरा होता है, लेकिन उन चुनौतियों के बीच आखिरकार उसे ही यह तय करना होता है कि इस जीवन को किस रूप में आगे बढ़ाना है। आज मैं कहानी सुनाने वाली हूँ साधारण सी दिखने वाली असाधारण महिला सुधा वैद्य की, खुशमिजाज, सरल, सहज और मिलनसार सुधा वैद्य […]

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दोहा-छंद “शारदे वंदना”

  विनय करूँ माँ शारदे, मिले कृपा भरपूर । तेरे शुभ आशीष से, हो संकट सब दूर।।   कंठ देवी वागेश्वरी, करो वीणा झंकार। मधुर ध्वनि सुनकर लोग उठें, तेज का संचार करें।   ज्ञानमयी करुणा करो, दे दो माँ वरदान। जीवन आलोकित रहे, हृदय भरे नित ज्ञान।।   वाग्देवी माँ शारदे, करते भक्त पुकार। […]

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तुम आओ बसंत

तुम आओ बसंत हिम से ठिठुरी, पतझड़ से उजड़ी , शाखों पर तुम, लौट आओ बसंत।   बंजर हुये खेतों मे, शुष्क हुये मेढ़ों में सूनी पड़ी अमराई में मंजरियों मे बगराओ बसंत।   रंगहीन हो रही धरा, व्याकुल हो रहा टिटहरा, बासंती चूनर ओढ़, सरसों फूलों पर छाओ बसंत।   सूनी उदास आँखें शिथिल […]

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मूक दर्शक

आज मेरा मन बहुत दुखी है या यूं कहें कि व्यथित सा है इसके कारण का जिक्र ज़रूर करना चाहूंगी, जो कि मेरी आंखों देखी है आज मैं किसी काम से महमूरगंज (वाराणसी) जा रही थी जिसके लिए मैं रथयात्रा चौराहे पर एक ईरिक्शा में जाकर बैठ गई और चालक अन्य सवारियों के लिए आवाज […]

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पद्मश्री जगदंबा देवी के प्रति सदैव ऋणी रहेगी मधुबनी पेंटिंग

बिहार एक ऐसा राज्य है जो अक्सर राजनीतिक हलचलों के कारण टेलीविजन तथा समाचार पत्रों में अपनी जगह बनाए रखता है। अगर हम किसी से भी बिहार के बारे में पूछें, तो वह सबसे पहले वहाँ के बारे में नकारात्मक बातें ही बताएगा। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में तो बिहार और बिहारी नाम सुनते […]

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