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तन और सेहत 

पुकार मन की  

स्त्री के बारे में एक कविता
Mind and Soul

स्त्री के बारे में एक कविता

बनी रहती है कठपुतली उसका सब कुछ है उधार का।। कहाँ अपने होते हैं पाली हुई चिड़िया के पंख। कहाँ…
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प्रकृति से न करो खिलवाड़
Mind and Soul

प्रकृति से न करो खिलवाड़

जीवन के हर मोड़ पर नये पन्नों का खुलना मानो प्रकृति के ऋतुओं में बदलाव आना बचपन की वे तोतली…
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कहानी- फड़फड़ाते पन्ने
Mind and Soul

कहानी- फड़फड़ाते पन्ने

माँ….माँ….कहाँ हो…..लगभग चिल्लाते हुए अमिय अपनी माँ को पुकारता हुआ रसोई में गया। माँ सब्जी काट रही थी। क्या हुआ…
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धन संसार