खुशियों का आशियां

Mind and Soul

सुबह पांच बजे उठकर अपनी बिटिया के लिए लंच बनाते हुए मधुर भजनों के साथ मेरे दिन की शुरुवात होती है, जो लोग मुझे व्यक्तिगत तौर पर जानते हैं उन्हें पता है गाने सुनना और और गाने गुनगुनाना मुझे बहुत पसंद है ।चाहे वो भजन हो ग़ज़ल हो या कोई भी फिल्मी गाना। इसी क्रम में भजन गज़ल या किसी भी गीत की कोई लाइन दिन भर गुनगुनाते हुए निकल जाता है पता नहीं आपके साथ ऐसा होता है या नहीं लेकिन मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है कोई भी भजन, गीत, ग़ज़ल सुबह गुनगुना लिया फिर तो उसे मैं दिन भर गुनगुनाती रहती हूं और आज सुबह उठते ही जगजीत सिंह जी गज़ल की एक लाइन अचानक ही गाने लगी,
“आज फिर दिल ने एक तमन्ना की……
आज फ़िर दिल को हमने समझाया”……..
ऐसा नहीं कि इस गज़ल को पहली बार सुना या गाया हो मैंने, लेकिन आज इस पंक्ति पर ध्यान दिया तो लगा कि, कितना गहरा जीवन दर्शन छुपा हुआ है, ।यदि हम आज के परिदृश्य में देखें तो कितना सटीक है। हमारी इस भाग दौड़ से भरी जिंदगी में सुकून से बैठ कर सोचने का भी समय नहीं है ऐसा क्यों? क्योंकि आज फिर दिल ने एक तमन्ना की….और हम अपनी जिंदगी की रेस में दौड़ पड़ते हैं,उस तमन्ना को पूरा करने के लिए। पहले तो एक छोटी सी तमन्ना मेरे पास एक नौकरी हो जिससे जीवन यापन किया जा सके, फ़िर एक अपना घर हो, फिर उसमें कुछ भौतिक सुख सुविधाएं उपलब्ध हो, ये तो सामान्य सी तमन्ना है और फ़िर शुरू होता स्टेटस सिंबल (सामाजिक प्रतिष्ठा) या यूं कहें कि समाज में अपनी आर्थिक स्थिति का दिखावा और E M I (इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट) या सीधे शब्दों में कहें तो मासिक किस्त की प्रक्रिया के बीच, कभी न रुकने वाली दौड़।
ये मैं किसी वर्ग विषेश (पुरुष या महिला) के लिए नहीं कह रही, आज कल सामान्य सी बात है।
प्रत्येक व्यक्ति कभी न खत्म होने वाले इस भागम भाग में कब शामिल हो जाता है उसे खुद भी नहीं पता। सुख सुविधाएं होनी चाहिए, यदि आप जी तोड़ मेहनत करते हैं तो आपको पूरा अधिकार है कि आप अपनी इच्छा और आराम का को प्राथमिकता देते हुए उसे पूरा भी करें इसमें कुछ ग़लत भी नहीं है। लेकिन उन इच्छाओं को पूरा करते हुए, मासिक किस्त जमा करने के लिए अगर आप अपने परिवार के साथ हंसी खुशी भोजन भी नहीं कर सकते उनके साथ खुशी के दो पल भी नहीं बिता सकते तो फिर इन भौतिक सुविधाओं का क्या औचित्य?
कहने का आशय ये है कि अपनी इच्छाओं को थोड़ा लगाम दें और अपने अपनों से मिले,बातें करें अपने सुख और दुख बांटे क्योंकि इच्छाएं तो अनन्त हैं और यदि आप सोच रहे हैं कि सब पूरा कर लूं तो फिर अपने लिए भी समय………
तो फिर आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं क्योंकि ऐसा कभी नहीं होने वाला। इच्छाएं अनंत और असीमित हैं, अपने आस पास नज़र घुमा कर देखिए यदि कोई व्यक्ति ऐसा मिले, जो आपसे कहे कि मेरी सारी इच्छाएं पूर्ण हो चुकीं हैं, तो शायद ही कोई ऐसा मिले आपको। इसलिए दौड़ से बाहर निकल आइए और अपने दिल को समझाइए और उस दौड़ में धीरे धीरे ही सही समाप्त होने वाले अपने समय को बचाएं और अपने परिवार तथा अपनों के साथ उस समय का सदुपयोग करें वास्तविक खुशी को तलाशें और जीएं क्योंकि भौतिक सुविधाएं आपको कुछ समय की खुशी या आपकी जरूरतों की पूर्ति कर सकता है लेकिन जो समय आप अपनों के साथ व्यतीत करेंगे वो आपको हार्दिक खुशी के साथ संतोष और आराम तो देते ही हैं विषम परिस्थितियों में यही संबंध आपको आत्मिक संबल भी प्रदान करते हैं आपका मनोबल भी बढ़ाते हैं । बहुत बार ऐसा होता है कि जब आप तमाम परेशानियों से परेशान होकर घर आते हैं तब आपके ये भौतिक सुख सुविधाएं भी आपको वो सुकून नहीं दे पाते ,जो आपके अपने साथ बैठ कर आपकी बड़ी से बड़ी समस्या को चुटकियों में हल कर ,जो राहत दे जाते हैं , तो सीधी सी बात यह है कि आप वस्तुओं की लंबी फेहरिस्त को कम करिए और आपके अपने आशियाने में भरिए ~
त्याग ,समर्पण और प्रेम की किश्तें
तब मिलेंगे अपनेपन के अनमोल रिश्ते
– स्मृति

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