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तन और सेहत 

पुकार मन की  

स्त्री और पौरुष
Mind and Soul

स्त्री और पौरुष

तुम्हारे पौरुष के पाँव जिन्दा हैं क्योंकि मैंने समेट रखा है अपने पाँवों को रेशम के कीड़ों की तरह। तुम्हारे…
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सिर्फ शब्द
Mind and Soul

सिर्फ शब्द

ककहरे के साथ ही सीख लिया था, हर शब्द का महत्व हर शब्द की सार्थकता हर शब्द का अपना वज़न…
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करो कुछ ऐसा कि फिर से खिल उठें मुरझाए हुए चेहरे
Mind and Soul

करो कुछ ऐसा कि फिर से खिल उठें मुरझाए हुए चेहरे

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत, ये पंक्तियाँ हमारे कविश्रेष्ठ द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी जी ने लिखी हैं,…
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धन संसार