मेरे स्वरों की पहचान रख लो

मेरी रचनाओं का इक नाम रख लो मेरे स्वरों की पहचान रख लो मुझ पर है विश्वास यदि मेरे विश्वास की आन रख लो मेरी आस मेरे विश्वास की हुई हार हरदम स्वयं से जीतने का आज मान रख लो अपने अस्तित्व को बनाए रखने की खातिर घायल हुई कई बार, वो निशान रख लो […]

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इक जुगनू भेजा था हमने आसमान में

सूनापन, तन्हाई और डर देखा हमने माँ के बाद सिसकता वो घर देखा हमने जैसे पत्थर में भी हमने रब देखा है वैसे इंसां में भी पत्थर देखा हमने इक जुगनू भेजा था हमने आसमान में मगर सितारा उसे समझकर देखा हमने गर दो चंदा होते तो फिर कैसा लगता छत पर उनको आज बुलाकर […]

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सबसे बड़ा हथियार

हथियार शब्द ही अपने आप में उतना ताकतवर है जितना कि उसका अर्थ। क्योंकि अगर दो व्यक्ति आपस में लड़ रहे हों और एक अचानक बोल दे कि दूर रहो मुझसे, वरना सोच लो, मेरे पास ‘हथियार’ है। इतना सुनते ही दूसरा व्यक्ति अचानक शान्त और थोड़ा डरा हुआ सा लगने लगता है। धीरे-धीरे उसका […]

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दीवार

अपने कंधों पर ले कर घूमती ना जाने कितने घर, मंदिर, कुटी और मीनार, दीवार। नींव में बरसों-तलक दब कर भी कभी उफ़ नहीं करती दीवार। लोग कहते हैं दीवारों के भी कान होते हैं पर कभी किसी से कुछ नहीं कहती दीवार। अपनी सख़्त बाँहों के घेरे में बचाये रखती हमारे परिवार को लोगों […]

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मीरा के साथ साथ में रसखान खो गया

नफ़रत की आँधियों में यूँ इंसान खो गया। दैरो-हरम के बीच में ईमान खो गया। छूने के हौसले तो थे आकाश को मगर, नाकामियों के साथ ये अरमान खो गया। तहज़ीब की ज़मीं पे मुहब्बत भी खो गई, मीरा के साथ साथ में रसखान खो गया। इनआम में मिली हैं ये तनहाइयाँ फ़क़त, दिल बेवफ़ा […]

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मौन हूँ, अनभिज्ञ नहीं

‘मौन हूँ, अनभिज्ञ नहीं’, ये करुण कथायें रहने दो मैं स्वयंसिद्ध जीवट नारी, निर्बाध गति से बहने दो। मैं सृजनशक्ति, नित कर्मशील अन्वेषा हूँ, मैं बुद्धिमती अभिमान रहित, मैं स्नेहसिक्त दुर्गा भी मैं, मैं पार्वती अन्तस में मेरे प्रश्न कई, अब प्रश्न मुझे भी करने दो मैं स्वयंसिद्ध जीवट नारी, निर्बाध गति से बहने दो […]

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सर्बजयाः स्वाभिमानी स्त्री की पहचान

  जब भी सत्यजीत रे की फिल्मों की बात होगी, पथेर पांचाली का नाम सबसे ऊपर रखा जायेगा। वैसे तो इस फिल्म का हर एक कलाकार अविस्मरणीय है, लेकिन सर्बजया इन सभी चरित्रों की धुरी है। सर्बजया केवल पथेर पांचाली में ही नहीं, बल्कि अपू त्रयी की तीनों फिल्मों में अहम किरदार के तौर पर […]

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पागल है रे तू

सबके लिए था उसके मन में प्यार, आदर, समर्पित भाव। लेकिन शायद खुद के लिए ये सब कमाना नहीं आया उसे। और जब-जब इस बात का अहसास होता, थोड़ी देर के लिए उदास हो जाती, फिर सोचती किसी ने कहा थोड़े ही था, ये सब तो उसके मन के ही भाव थे, फिर शिकायत कैसी […]

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कायदा-ए-कोरोना

लोगों से मिलना घूमना-टहलना बाहर निकलना मना हो गया किसी के भी साथ हँसना-बोलना और किसी के साथ बैठना मना हो गया जो ना माना इन बंदिशों को वो हँसता-बोलता इंसान दुनिया से फना हो गया ऐसे करो ना, वैसे करो ना यही तो कायदा-ए-कोरोना हो गया जो न माना इन बंदिशों को…. पहले कहते […]

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चारूलताः मानसिक द्वंद्व की प्रतीक

फिल्मों के शौकीन लोगों में सत्यजीत रे का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। सत्यजीत रे सिनेमा जगत में किस ऊँचाई पर खड़े हैं, उसको समझने के लिए जापानी फिल्मकार अकीरा कुरासोवा का एक कथन ही पर्याप्त है। कुरासोवा कहते हैं, यदि आपने सत्यजीत रे की फिल्में नहीं देखी हैं, तो इसका मतलब आप […]

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