नव वर्ष
खुशी-खुशी कर दो विदा, कहे दिसंबर मास। स्वागत कर नववर्ष का, मन में ले उल्लास।। पात पुराने जब झरे, आते तब नव पात। वृक्ष दुखी होता नहीं, छोड़ अंग के जात।। बात दिसंबर की खरी, जीवन का है सार। चक्र कालका घूमता, मिलना अगली बार।। यह जग एक सराय है, महीने सब मेहमान। पूर्ण अवधि […]
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