तुम आओ बसंत
तुम आओ बसंत हिम से ठिठुरी, पतझड़ से उजड़ी , शाखों पर तुम, लौट आओ बसंत। बंजर हुये खेतों मे, शुष्क हुये मेढ़ों में सूनी पड़ी अमराई में मंजरियों मे बगराओ बसंत। रंगहीन हो रही धरा, व्याकुल हो रहा टिटहरा, बासंती चूनर ओढ़, सरसों फूलों पर छाओ बसंत। सूनी उदास आँखें शिथिल […]
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