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तन और सेहत 

पुकार मन की  

देह के सौजन्य से विरहिन सरीखा रूप पाऊँ
Mind and Soul

देह के सौजन्य से विरहिन सरीखा रूप पाऊँ

रात्रि की निस्तब्धता में, चाँदनी के द्वार जाऊँ सूर्य के मनुहार में फिर से प्रभाती राग गाऊँ शून्य की मानिंद,…
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नारी मन मत तोलिये, उसका नभ विस्तार
Mind and Soul

नारी मन मत तोलिये, उसका नभ विस्तार

नारी से घर होत है, नारी से संसार। नारी बिन नर भी कहाँ, नारी है आधार।। नारी ही सम्हालती, संस्कृति…
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अस्मिता
Mind and Soul

अस्मिता

कितना सुख था तब रहती थी डरी-डरी, सह लेती थी सब कुछ। किन्तु जब से खोजने लगी हूँ अस्मिता एक…
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धन संसार