नटखट-नटखट कान्हा देखो, सबका मन हर लेता है,
चंचल नयनों से देख सखी माखन सारा लेता है।।
लाल यशोदा का देखो तो
कैसी धूम मचाता है,
छोटे-छोटे पग धर-धर के, ठुमक-ठुमक कर आता है॥
गोपियाँ उलाहना यशुमति को
नित जा कर बरबस देती हैं।
पकड़ा हमने कान्हा को सुन यह कह कर वे हँस देती हैं।
कान पकड़कर तब किशना बस अपनी आँख चुराता है,
मैया का गुस्सा पल भर में
ममता बन कर ढल जाता है॥
लाल यशोदा का देखोतो
कैसी धूम मचाता है…।।
छोटे-छोटे पग धर- धर के, ठुमक-ठुमक कर आता है।।
सिर पर मोर मुकुट सोहे
मेघा-से केश घने काले।
अधरों पर मुरली सजती है,
वैजंती ग्रीवा में डाले।
नीलम जैसी आभा उसकी चँदा सा मुख दिप- दिप दमके,
जब-जब हँसता कान्हा मेरा, जैसे बिजली मन में चमके॥
लुकता-छिपता नन्हा कान्हा
हर गोपी को तरसाता है।
लाल यशोदा का देखो तो
कैसी धूम मचाता है…।।
छोटे-छोटे पग धर- धर के, ठुमक ठुमक आता है।।
वेणु बजाता यमुना तट पर
सखा संग वन जाता है।
मुरली की मधुरिम तानों से, सबको मोहित कर जाता है।
भक्तों का रखवाला वो तो, सबका संकट हरता है,
छोटा सा वो बाल कन्हाई, जग का पालन करता है॥
लाल यशोदा का देखो तो कैसी धूम मचाता है…।।
छोटे-छोटे पग धर- धर के , ठुमक ठुमक आता है।।
ज्योति नारायण।

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