जब याद तुम्हारी आती है, धड़कन भी रुक सी जाती है।
तुम दूर गए जबसे मोहन, यह रात जगा कर जाती है।
हर साँस में बस तुम बसते हो, मन लिखता तुमको पाती है।
वो शाम का मिलना भूल गए? वो रास रचाना भूल गए?
वंशी की मीठी तानों से, मुझको तड़पाना भूल गए?
अब यमुना की हर लहर मुझे, एक दर्द नया दे जाती है।
जब याद तुम्हारी आती है…।।
जग भले कहे तुम राजा हो, मेरे तो बस तुम कान्हा हो।
इस सूने मन के मंदिर का,
तुम ही तो एक ठिकाना हो।
मेरी सुधियों की कोयलिया
बस गीत तुम्हारे गाती है।
जब याद तुम्हारी आती है…।।
अब जोग लिया, वैराग चुना, बस तुमको अपना माना था।
इस प्रेम-दीवानी राधा ने,
मनमीत न कोई जाना था।
अब आ भी जाओ मनमोहन यह उमर गुजर अब जाती है।
जब याद तुम्हारी आती है…।।
ज्योति नारायण।

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