देहरी

औरतें सूनी आँखें लिए मुँह भरकर दर्द रोती हैं देहरी पर….. फिर आपस के दर्द को बराबर तोलकर बाँट लेती हैं, और हल्की होकर भर लेती हैं खुशियों वाला ऑक्सीजन……. जिसे देहरी से अंदर जाकर बनना ही है अंततः विषैली कार्बन डाइऑक्साइड… फिर छटपटाती कलपती लौटना है देहरी पर, जहाँ औरतें बैठी हैं और भर […]

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एक ही बात बार-बार सोच कर परेशान होने वालों को बीके शिवानी (BK Shivani) ने दिया सुख का फॉर्मूला

किसी के बारे में बार-बार सोच कर परेशान होने वालों के लिए आध्यात्मिक शिक्षक बीके शिवानी (BK Shivani) ने आज कू (Koo) के माध्यम से एक समाधान पेश किया है। इससे न केवल उनकी परेशानी दूर होगी, बल्कि उनको नयी शक्ति भी मिलेगी। शिवानी ने लिखा, किसी के बारे में बार बार सोचने से, उनकी […]

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अमृता प्रीतम- जिन्होंने विभाजन का दर्द जैसा महसूस किया, वैसा ही कागज पर उतार दिया

पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री मानी जाने वाली अमृता प्रीतम (Amrita Pritam) का आज जन्म दिन है। अमृता प्रीतम का जन्म 31 अगस्त 1919 को पाकिस्तान के गुजरांवाला में हुआ था। उनका बचपन लाहौर में बीता तथा उनकी शिक्षा भी वहीं हुई। इनके पिता शिक्षक थे। जब अमृता की उम्र मात्र 11 वर्ष थी, तब […]

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गुल्लक आउटडेटेड हो गये हैं

बचपन में मिट्टी की गुल्लक में सिक्कों का संचय हर बुरे वक़्त पर अच्छा वक़्त लाने की कोशिश सिखायी जाती थी …. सिखा दिया जाता था धैर्य, संयम, परहित और ऐसे ही जीवन मूल्य पिता और माँ के दिये एक-एक सिक्के का अपना महत्व था …. फोड़ने पर नहीं, बल्कि नहीं फोड़ने पर मिलती शाबाशी […]

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मैं खुश हूँ कि मैं नारी हूँ

मैं खुश हूँ कि मैं नारी हूँ दुर्गा, शक्ति, शिवा, धात्री कहलाने की मैं ही तो अधिकारी हूँ।   चाहे जितनी दो यातनाएँ, प्रताड़नाएँ या बाँधो जंजीरों में मैं इन सबसे कब हारी हूँ? मैं खुश हूँ कि मैं…………….   प्रेम, दया, करुणा धर अपने मन में, काँटों से घिरी हुई, मैं एक फुलवारी हूँ मैं खुश हूँ कि […]

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एक परी मेरे मन में सोती भी है, रोती भी है

एक परी मेरे मन में सोती भी है, रोती भी है। और उम्र सपनों की गठरी, ढोती भी है, खोती भी है।। मन का मेरे हाल ना पूछो, हाल हुआ बेहाल ना पूछो, लहर-लहर लहराती नदियाँ, हैं कितनी उत्ताल न पूछो। जीवन के तटबंधों तक आ, मुझको वही भिगोती भी है। एक परी मेरे मन […]

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अमर शहीदों की धरती को नमन करो

अमर शहीदों की धरती को नमन करो बलिदानों का बीज भूमि में वपन करो। करो प्रतिज्ञा तुम इसके सम्मान की वह रण छंगी वाना तुम भी वरण करो।। यह परंपरा है आजस्त्र पुरखों वाली यह गाथा है बलिदानों अमरों वाली। नई चेतना इसी गर्भ से जन्मेगी गीतों की अंतरध्वनि है वीरों वाली। अमर शहीदों की […]

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बीके शिवानी (BK Shivani) ने रक्षा बंधन को दिया है नया मतलब, आप भी जानिए

आध्यात्मिक शिक्षक बीके शिवानी (BK Shivani) ने रक्षा बंधन के मौके पर इस त्योहार को अलग तरीके से समझाने का प्रयास किया है। ट्विटर पर शिवानी ने लिखा, अहंकार, नफरत, दुःख, अशांति, डर… हर गलत सोच, बोल और कर्म से अपनी रक्षा करें आत्मा और परमात्मा के प्यार का बंधन ही रक्षा बंधन है (लेडीज […]

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आत्माएँ

भटक रही है वो भी जैसे भटकती हैं अतृप्त आत्माएँ.… आत्माओं का भटकना कुछ ने सुना कुछ ने अनुभूत किया है पर निष्कर्ष यही कि भटकती हैं अतृप्त आत्माएँ….. अतृप्ति क्या है? कोई इच्छा कोई आकांक्षा कोई चाह कोई कामना जो पूरी हो न सकी……. अतृप्ति बोझ है सीने का दिल में लगा शूल है […]

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आत्मसम्मान

हर सम्मान से पहले, आत्मसम्मान जरूरी है। विधाता ने जीवन दिया, इस जीवन का मान जरूरी है। आत्मसम्मान के बिना, राजा रंक बना फिरता है। आत्मसम्मान से भरा रंक, राजा की तरह जीता है। आत्मसम्मान यदि मरता है, इंसान मन से मर जाता है। निभाता है वह हर रिश्ता, खुद मन से मर जाता है। […]

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