नव वर्ष

खुशी-खुशी कर दो विदा, कहे दिसंबर मास। स्वागत कर नववर्ष का, मन में ले उल्लास।। पात पुराने जब झरे, आते तब नव पात। वृक्ष दुखी होता नहीं, छोड़ अंग के जात।। बात दिसंबर की खरी, जीवन का है सार। चक्र कालका घूमता, मिलना अगली बार।। यह जग एक सराय है, महीने सब मेहमान। पूर्ण अवधि […]

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संघर्ष

कहते है जिंदगी का दूसरा नाम संघर्ष है, पर क्यूँ ,हर संघर्ष की घड़ी में कोई न कोई पिछड़ा है । अक्सर टूटे सपनो से बिखर जाया करते है वो लोग जो भी यहाँ जीवन के सच से रहते अन्जान अब सपने सजोने वाली उन आँखों का क्या कसूर नादान दिल की वो तो बस […]

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मुझे भी अपना सा हे शिव बना दो

मुझे भी अपना सा हे शिव बना दो तुम सा ही मैं रख लूँ कंठ मे गरल हो जाये ह्रदय तुम सा ही हो तरल मुझे भी कल्याणमयी तुम बना दो। कंठ से नीचे उतरे तो हो मन आहत मुख से निकले तो हो जाये जन आहत मुझे भी निर्गुण तुम जैसा बना दो तुम्हीं […]

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विद्या भंडारी की कविता

कुछ चेहरे लुप्त हुए कुछ चेहरे नये जुड़े जीवन के अध्याय में कई नये बदलाव जुड़े। कुछ की दिनचर्या बदली कुछ बहुत एक्टिव हुए। सोच कुछ की हरी हुई कुछ की सुखी धरा हुई । वक्त के नये मोड़ पर सर्द मौसम हो गया पन्ने कुछ उड़ने लगे उम्र की किताब के। सोचूँ आँख बंद […]

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ज्योति नारायण की कविता

नारी का एक सुन्दर रूप जल की तरह सूर सरिता कूल है तू , सलिल सुचिता संचिता, नीर है और क्षीर भी है, धीर वीर सी सविता । बह रही अच्छुण धरा जो, वो ही है तू अमरता, गिरि शिखर को लाँघती, कहीं धार धार सी धारिता । जागृति अध्याय प्रथम तू, चेतना चैतन्यता, और […]

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डॉ. मनोरमा चंद्रा “रमा” की रचना- मित्रता

मित्र मिलन की भावना, जागे मन में आज। बचपन के दिन याद कर, सुख का हो आगाज।। कदम कदम पर साथ चल, किए नेक सब काम। सदा दोस्त हमदर्द बन, हरते विपत तमाम।। श्रेष्ठ मित्र पहचान कर, करना उससे प्रीत। निश्छलता के भाव से, बन जाना मनमीत।। छोड़ो मत यूँ साथ को, बना रहे ये […]

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नीलिमा मिश्रा की रचना- रीत

कैसी “रीत” है दुनिया की, कि संग संग रहते हुये भी, मिलते नहीं कभी नदिया, झील और सागर के दोनों किनारे, चाँद और सूरज की , युगल जोड़ी है संग संग, फिर भी इनका मिलन है दुश्वारे, राधा कृष्ण एक होते हुये भी, ना मिल पाये कभी , जगत रीत के मारे, राम और सिया […]

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वर्षा रावल की रचना- एक कहानी …..

झूठ कहते हैं जो कहते हैं, मरने के बाद कुछ भी साथ नहीं जाता….. विश्वास नहीं तो खोद दो दफन हुई औरतों की लाशें, अग्नि को समर्पित मरी हुई औरतों का इतिहास…. सदियों पहले मर चुकी औरतें हों या उसके बाद क्रमशः उम्रदराज़ हो, युवती या बच्ची ही स्त्री जाति की हर मृत आत्मा के […]

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तस्वीरें बोलती हैं, पुरानी यादों के पट खोलती हैं

तस्वीरें… एक जमाना था, जब तस्वीर, कैमरा, स्टूडियो आदि के नाम से ही हमारे चेहरे पर एक नूर सा छा जाता था। तस्वीरों का शौक यूँ तो सबको ही होता है, लेकिन महिलाओं में यह शौक खास तौर पर देखा जाता है। यह सच कल भी था और आज भी है, बस उस शौक को […]

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ज्योति नारायण की रचना- सुरमई

कर रहा है सफर सौरभी गुलमोहर सुरमई शाम भी आज जाये ठहर मैं निशा के पहर देखती थी डगर खिड़की पे खड़ा चाँद आया नजर करके बातें उसे भी बुलाया है घर बन के मितवा तभी भर लिया हाथ धर प्रीत मन में पली खिल गया फिर बहर मौजे तूफां उठा है दिल के सगर […]

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