कर्मभूमि तेलंगाना में रह कर हिन्दी का प्रचार-प्रसार कर रही हैं ज्योति नारायण
कविता कब से लिखना आरंभ किया, स्वयं को ही पता नहीं। बचपन में कोटेशन लिखने की आदत थी। कुछ भी मन में आया, डायरी में नोट करती थी। खुश होती या क्रोधित होती, तो भी लिखती थी। कम उम्र में शादी होने पर गृहस्थी का जुआ कन्धे पर आने पर स्वयं पर कभी ध्यान नहीं […]
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