जितिया व्रत पर खास पेशकश- माँ की वसीयत और तीन अन्य कविताएँ

माँ के लिए जितिया व्रत (या जीवित्पुत्रिका व्रत) से बड़ा कोई व्रत नहीं होता। आज इस व्रत के मौके पर पेश हैं माँ के कुछ भाव, जो देश की कई कवयित्रियों ने पेश किये हैं। वसीयत छोड़ जाऊँगी वसीयत में अपने संग्रहित किताबों के अनमोल खजाने बेटियों के लिये, अपने तीज-त्योहार अपने संस्कार अपनी परम्परा […]

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महँगाई पर लिखने वाला क्या सच में निर्धन होता है

क्या करुणा को गाने वाले जीवन में व्याकुल होते हैं? क्या हास्य विधा के महारथी हँसते ही जगते सोते हैं? क्या ओज विधा के लेखक बंदूकें लेकर घर जाते हैं? क्या राणा को गाने वाले चेतक को सैर कराते हैं? महँगाई पर लिखने वाला क्या सच में निर्धन होता है? जो बात चिरागों की करता […]

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जज्बात-ए-दिल हैं ऐसे कि रिश्ते कम रखती हूँ

जज्बात-ए-दिल हैं ऐसे कि रिश्ते कम रखती हूँ। अब हर बात में हाँ कहना छोड़ दिया मैंने, अब तो ना कहने का हुनर भी अपने संग रखती हूँ। जज्बात-ए-दिल हैं ऐसे कि रिश्ते कम रखती हूँ। किसी को दर्द देने का इरादा नहीं है मेरा, लेकिन बात सही है, तो कहना भी है जरूरी, ऐसे […]

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कारोबार

सुख आये तो बिठा देना दूर भले ही चाय-पानी मत पूछना उसके साथ बतियाना कम हँस लेना थोड़ा ज्यादा तवज्जो मत देना जब भी आयेगा झूठ का लबादा ओढ़े रहेगा दुख आये तो आदर और लाड़ से बिठाना पानी-चाय पूछना मनुहार करके खिलाना ख्याल रखना उसका दुख जब भी आयेगा ढेर सारा सच लेकर आयेगा […]

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प्रेम

क्यूँ झुकता है आसमां, बाँहों में समेटने धरती को, हाँ ये प्रेम ही तो है। क्यूँ गुनगुनाते हैं भौंरे, चूमने फूलों को हाँ ये प्रेम ही तो है। क्यूँ दौड़ती है नदी, सागर में समाने, हाँ ये प्रेम ही तो है। क्यूँ बादल बरसते हैं, पर्वतों पर, हाँ ये प्रेम ही तो है। क्यूँ आँख […]

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खेतों की मेड़ों पर ये चली है, तब कहीं जाके ये माँ सी ढली है

छू लिया है जिसने हिमालय उस पर्वतराज का है ताज हिन्दी। कंठ है, सुर है, है साज हिन्दी, है करोड़ों की आवाज हिन्दी।। खेतों की मेड़ों पर ये चली है तब कहीं जाके ये माँ सी ढली है। इसकी पहचान हर एक डगर है, इसकी पहचान हर एक गली है।। तेलुगू, कन्नड़, तमिल, बांग्ला, मराठी, […]

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सुंदर है, मनोहर है, मीठी है, बहुत ही मनोरम परिचय है इस हिन्दी का

पूछा किसी ने मुझसे, इस अंग्रेजी के जमाने में, क्या महत्व है हिन्दी का….? ज्यादा कुछ तो नहीं दो लाइनें बस कहीं मैंने, महाभारत के युद्ध में जो स्थान है शिखंडी का माँ शब्द को पूरा करने के लिए जो महत्व है एक छोटी सी बिंदी का, ऐसा ही कुछ खास महत्व है भाषाओं में […]

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मानव और सभ्यता के विकास का आधार हिन्दी ही तो है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिन्दी दिवस के अवसर पर लोगों को बधाई दी है। एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा- “आप सभी को हिन्दी दिवस की ढेरों बधाई। हिन्दी को एक सक्षम और समर्थ भाषा बनाने में अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। यह आप सबके प्रयासों का ही परिणाम है कि […]

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गुरु की महिमा अगाध

अँधेरे से उजाले की ओर, सूरज की किरणों सा, दीपक की भाँति राह दिखाते अज्ञान से ज्ञान की ओर, जीवन की नय्या पार कराते, किनारे पर पहुँचाते निराशा से आशा की ओर, प्रेरणा के उत्तुंग शिखर पर आसनस्थ कराते नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर, सूर्य के किरण की भाँति तेज भरते जिन्दगी के हर कदम […]

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सब कुछ देखते-देखते बदल गया, शिक्षकों के प्रति आभार जताने का तरीका भी

आज शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को सादर नमन है। आज के परिवेश में शिक्षा के क्षेत्र में अनेक तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। जहाँ शिक्षा में नयी-नयी तकनीकों का प्रयोग दिख रहा है, वहीं नयी शिक्षा नीतियों और पद्धतियों का भी समावेश परिलक्षित हो रहा है। जहाँ पढ़ने और […]

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